आज शायद बहुत से युवा ‘अनंत पई’ का नाम न जानते हों। लेकिन जो लोग 1970, 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में बड़े हुए, उनके लिए वे बस ‘अंकल पई’ थे, वही व्यक्ति जिनके द्वारा प्रकाशित कॉमिक्स ने उस जमाने के बच्चों को भारत के नायकों और इतिहास से परिचित कराया।
कॉमिक्स लिखने का ‘अनंत पई’ का सफर किसी शौक की वजह से नहीं, बल्कि निराशा के कारण शुरू हुआ था। 1967 में, वह अपनी पत्नी के साथ नई दिल्ली में एक किताबों की दुकान पर गए थे, जहां एक टेलीविजन क्विज ने उनका ध्यान खींचा। उन्होंने देखा कि सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र ग्रीक और रोमन पौराणिक कथाओं से जुड़े सवालों के जवाब पूरे आत्मविश्वास और आसानी से दे रहे थे। वे ज्यूस, एथेना और माउंट ओलंपस देवताओं के नाम बिना किसी परेशानी के बता रहे थे। परंतु जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि ‘भगवान राम की मां कौन थीं?’ तो स्टूडियो में सन्नाटा छा गया। कोई भी छात्र जवाब नहीं दे सका।
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