The Battle of Chatra (1857): साल 1857 में, ब्रिटिश शासन के विरुद्ध बड़ा विद्रोह छोटा नागपुर तक पहुंच गया और इस इलाके को अंग्रेजों के विरुद्ध प्रतिरोध का एक और मोर्चा बना दिया। रांची से लेकर डोरंडा, हजारीबाग और चतरा तक, भारतीय विद्रोही सैनिक और स्थानीय समर्थक ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार को मानने से इनकार करने लगे। जल्द ही चतरा इस संघर्ष का एक अहम युद्ध-क्षेत्र बन गया।
चतरा केवल एक युद्ध-क्षेत्र नहीं था, यह छोटा नागपुर, बिहार व अवध में विद्रोहियों के मजबूत ठिकानों के बीच एक रणनीतिक प्रवेश-द्वार था। अंग्रेजों के लिए, विद्रोहियों को चतरा में ही रोकना बहुत जरूरी था ताकि वे कंपनी के शासन के विरुद्ध कोई बड़ा और संगठित मोर्चा न बना सकें।
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