रात के 8:00 बज चुके थे। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग हाईवे पर चारों ओर गहरा अंधेरा छा गया था। गुजरात की नंबर प्लेट वाली एक प्राइवेट बस में 50 से ज्यादा तीर्थयात्री सवार थे, जो अपनी अमरनाथ यात्रा पूरी करके लौट रहे थे।
लगातार कई दिनों की यात्रा की थकान सबके चेहरों पर साफ़ झलक रही थी। फिर भी, उनके दिल बाबा बर्फानी (भगवान शिव) के दर्शन करने के परम आनंद से भरे हुए थे। जहां कुछ लोग अपनी सीटों पर पीछे की ओर सिर टिककर सोने की कोशिश कर रहे थे, वहीं कुछ लोग धीरे-धीरे भक्ति गीत गा रहे थे और ‘जय भोलेनाथ’ का जाप कर रहे थे। सब कुछ एकदम शांतिपूर्ण लग रहा था।
और पढ़ें
