भारत की धरती का कण-कण सनातन सभ्यता के गौरव का साक्षी है। कहीं हजारों वर्ष पुराने मंदिरों के भग्नावशेष हैं, तो कहीं मिट्टी की परतों में दबे ऐसे प्रमाण, जो इतिहास की भूली-बिसरी गाथाओं को फिर से जीवित कर देते हैं।
अयोध्या की पावन श्रीराम जन्मभूमि भी सदियों तक ऐसा ही एक रहस्य बनी रही। करोड़ों हिंदुओं की आस्था थी कि यही भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है, लेकिन समय के साथ यह प्रश्न भी इतिहास के सामने खड़ा हो गया कि क्या इस स्थान पर कभी एक भव्य मंदिर था। इस प्रश्न का उत्तर खोजने में जिस व्यक्ति का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आता है, वह हैं भारत के महान पुरातत्वविद् प्रोफेसर बीबी लाल (ब्रज बासी लाल)। उन्होंने अपनी कुदाल से ऐसे पुरातात्विक साक्ष्य सामने रखे, जिन्होंने रामजन्मभूमि के ऐतिहासिक दावों को एक नया आधार दिया।
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