Battle of Asal Uttar : जब गन्ने के खेत बने पाकिस्तानी टैंकों का कब्रिस्तान! 1965 में भारतीय सेना ने ऐसे पलट दिया पूरा युद्ध

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Battle of Asal Uttar : 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान ने पंजाब के खेमकरण सेक्टर में अपनी शक्तिशाली फर्स्ट आर्मर्ड डिवीजन उतारी। उसका लक्ष्य ब्यास नदी के पुल पर कब्जा कर पंजाब को भारत के बाकी हिस्सों से काटना था। शुरुआत में पाकिस्तानी सेना को कुछ बढ़त मिली, लेकिन 8 से 10 सितंबर 1965 के बीच तरनतारन जिले के असल उत्तर गांव के पास भारतीय सेना ने उसकी रणनीति को विफल कर दिया। 

दरअसल, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय चौथी पर्वतीय डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल गुरबख्श सिंह ने एक साहसिक और दूरदर्शी निर्णय लिया। उन्होंने अपनी सेना को खेमकरण से योजनाबद्ध ढंग से पीछे हटने का आदेश दिया और असल उत्तर गांव को केंद्र बनाकर एक मजबूत रक्षात्मक मोर्चा तैयार किया।

यह केवल पीछे हटना नहीं था, बल्कि दुश्मन को अपने ही बनाए जाल में फंसाने की सुनियोजित रणनीति थी। रातोंरात भारतीय सैनिकों ने आसपास के गन्ने के खेतों में पानी भर दिया। देखते ही देखते उपजाऊ खेत दलदल में बदल गए, जबकि अंधेरे में पाकिस्तान को इस योजना की भनक तक नहीं लगी।

अगली सुबह पाकिस्तान की प्रथम बख्तरबंद डिवीजन पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ी। अमेरिका निर्मित आधुनिक एम-47 और एम-48 पैटन टैंकों पर उसे पूरा भरोसा था। लेकिन जैसे ही ये भारी-भरकम टैंक असल उत्तर के मैदान में पहुंचे, वे भारतीय सेना द्वारा रचे गए चक्रव्यूह में फंस गए। दलदली जमीन ने उनकी रफ्तार थाम ली। कीचड़ में धंसते टैंक न आगे बढ़ पा रहे थे और न ही तेजी से दिशा बदल पा रहे थे। देखते ही देखते पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई।

यही वह क्षण था, जिसका भारतीय सेना इंतजार कर रही थी। चारों ओर से हुए सटीक और जबरदस्त जवाबी हमले ने पाकिस्तानी बख्तरबंद डिवीजन को झकझोर कर रख दिया। इस भीषण संघर्ष में पाकिस्तान के 100 से अधिक टैंक नष्ट कर दिए गए और 40 से अधिक टैंकों पर भारतीय सेना ने कब्जा कर लिया। वहीं, भारतीय पक्ष के अनुसार इस पूरे युद्ध में उसके केवल 10 टैंक ही नष्ट हुए। 

असल उत्तर का युद्ध एक सामरिक जीत के साथ-साथ पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली बख्तरबंद डिवीजन की रीढ़ तोड़ने वाला भी साबित हुआ। यह भी सच है कि यदि पाकिस्तान की योजना सफल हो जाती, तो अमृतसर और पंजाब के बड़े हिस्से को खतरा पैदा हो सकता था। लेकिन भारतीय सेना की सूझबूझ, इलाके का चतुर उपयोग और सैनिकों की वीरता ने इस खतरे को समाप्त कर दिया।

असल उत्तर की लड़ाई की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यहां आधुनिक हथियारों और उन्नत टैंकों से लैस पाकिस्तानी सेना को भारतीय सैनिकों की सूझबूझ, शानदार युद्धनीति और इलाके का सही इस्तेमाल करने की रणनीति ने हरा दिया। यही कारण है कि सैन्य इतिहासकार इस लड़ाई को दुनिया की सबसे सफल सैन्य रणनीतियों में से एक मानते हैं।