Anglo-Manipur War 1891: 26 मार्च 1891 की सुबह मयांगखांग के आसपास के जंगलों में खोज जारी थी। पिछली रात डाक बंगले पर हुए हमले में ब्रिटिश टेलीग्राफ अधिकारी जेम्स ओ’ब्रायन मारा जा चुका था, लेकिन उसके दूसरा अधिकारी डब्ल्यू. बी. मेलविल, गवर्नमेंट टेलीग्राफ डिपार्टमेंट के सुपरिंटेंडेंट, अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला थे। मणिपुरी सैनिक और स्थानीय नागा युवक जंगलों में रातभर उनकी तलाश करते रहे।
तभी एक पहाड़ी जलधारा के पास मेलविल घायल अवस्था में खोज निकाला गया। उसे खोजने वाला युवक था मयांगखांग का 30 वर्षीय चिराई नागा, जिसे ब्रिटिश अभिलेखों में ‘Chirai Naga, son of Chunba of Mayangkhang’ भी कहा गया। कुछ ही देर बाद मेलविल की मृत्यु हो गई और उसका सिर काटकर गांव लाया गया। उस समय यह युद्ध की ट्रॉफी मानी गई, लेकिन इस घटना के छह महीने बाद चिराई नागा को फांसी दी गई। अब सवाल है कि आखिर चिराई नागा ने अंग्रेज अफसर को क्यों मारा? इसको समझने के लिए पहले 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध की पृष्ठभूमि समझना जरूरी है।
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