भाखड़ा मुख्य नहर (BML) के बुदकी साइफन को उड़ाने की यह साजिश कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह अलगाववादी चरमपंथियों द्वारा बेहद ठंडे दिमाग से तैयार किया गया एक बड़ा रणनीतिक हमला (Strategic Strike) था।
ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984) के बाद, जरनैल सिंह भिंडरावाले के मारे जाने और स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों के सफाए के बाद अलगाववादी नेतृत्व तितर-बितर हो चुका था। लेकिन पाकिस्तान में बैठे उनके आका और सीमा पार छिपे कुछ टॉप कमांडर भारत सरकार से बदला लेने के लिए छटपटा रहे थे।
और पढ़ें




