Tag: Indian Army

  • 21 जुलाई 1984 : जब आतंकियों ने पानी को हथियार बनाकर तोड़ी देश की लाइफलाइन, तब भारतीय सेना ने कैसे दी उनके इरादों को मात?

    21 जुलाई 1984 : जब आतंकियों ने पानी को हथियार बनाकर तोड़ी देश की लाइफलाइन, तब भारतीय सेना ने कैसे दी उनके इरादों को मात?

    भाखड़ा मुख्य नहर (BML) के बुदकी साइफन को उड़ाने की यह साजिश कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह अलगाववादी चरमपंथियों द्वारा बेहद ठंडे दिमाग से तैयार किया गया एक बड़ा रणनीतिक हमला (Strategic Strike) था। 

    ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984) के बाद, जरनैल सिंह भिंडरावाले के मारे जाने और स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों के सफाए के बाद अलगाववादी नेतृत्व तितर-बितर हो चुका था। लेकिन पाकिस्तान में बैठे उनके आका और सीमा पार छिपे कुछ टॉप कमांडर भारत सरकार से बदला लेने के लिए छटपटा रहे थे। 

    और पढ़ें
  • 93 दिन, तीन आतंकवादी और एक मिशन : भारत के ‘ऑपरेशन महादेव’ की इनसाइड स्टोरी—वह तलाशी,जिसने पहलगाम हमले का बदला लिया

    93 दिन, तीन आतंकवादी और एक मिशन : भारत के ‘ऑपरेशन महादेव’ की इनसाइड स्टोरी—वह तलाशी,जिसने पहलगाम हमले का बदला लिया

    एक साल पहले, 22 अप्रैल 2025 को, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी के शांत घास के मैदान एक खौफनाक जगह में बदल गए थे, जब पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादियों के एक क्रूर आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। यह एक सुनियोजित हमला था, पहले हिंदू पुरुषों को अलग किया गया और फिर उनकी पत्नियों, बच्चों और परिवारों के सामने ही उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई। 

    लेकिन भारत न तो इसे भूला, और न ही उन्हें माफ किया। इसके बाद के हफ्तों में, एक दृढ़ और व्यवस्थित जवाबी कार्रवाई ने आकार लेना आरम्भ किया, जिसका नतीजा ‘ऑपरेशन महादेव’  नाम के एक बेहद सटीक आतंकवाद-रोधी अभियान के रूप में सामने आया।  इस अभियान ने यह सुनिश्चित किया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूढ़ निकाला जाए और उन्हें सजा दिलाई जाए। आज, हम विस्तार से बता रहे हैं कि यह पूरा ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया गया और इस क्रूर हमले के दोषियों को कैसे सजा के कटघरे तक पहुंचाया गया।

    और पढ़ें
  • लेफ्टिनेंट जनरल के. बहादुर सिंह : वह व्यक्ति, जिसने NDC को बचाया

    लेफ्टिनेंट जनरल के. बहादुर सिंह : वह व्यक्ति, जिसने NDC को बचाया

    भारत की रक्षा संबंधी सोच 1959 में तब आकार लेने लगी, जब भारत ने नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) की स्थापना की और बहादुर सिंह को इसका पहला कमांडेंट नियुक्त किया गया। इस संस्थान को आरम्भ से खड़ा करने की जिम्मेदारी संभालते हुए, बहादुर सिंह ने इसे केवल एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र से कहीं ज्यादा एक ऐसे मंच के रूप में ढाला, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और सिविल सेवक एक साथ रणनीति, शासन-प्रशासन और वैश्विक मामलों का अध्ययन करते थे, जिससे खुली चर्चा और विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा मिला।

    और पढ़ें
  • रेगिस्तान की तोप, जो बर्फीले पहाड़ों पर भी गरजी! जानिए K9 वज्र-टी की अनोखी कहानी

    रेगिस्तान की तोप, जो बर्फीले पहाड़ों पर भी गरजी! जानिए K9 वज्र-टी की अनोखी कहानी

    क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक तोप, जो मूल रूप से गर्म रेतीले रेगिस्तानों में दुश्मन को धूल चटाने के लिए बनाई गई थी, आज भारत की सबसे ऊंची और ठंडी बर्फीली चोटियों पर भी उतनी ही जोरदार गर्जना कर रही है? यह K9 वज्र-टी की सच्ची और अनोखी कहानी है। यह भारतीय सेना की तोपखाने की ताकत को पूरी तरह बदल देने वाली प्रणाली है, जो पाकिस्तान से लेकर चीन तक की सीमाओं पर मजबूत ढाल बनी हुई है।

    और पढ़ें
  • मेजर मोहित शर्मा क्यों बन गए आतंकी इफ्तिखार भट्ट?

    मेजर मोहित शर्मा क्यों बन गए आतंकी इफ्तिखार भट्ट?

    मेजर मोहित शर्मा, भारतीय सेना के 1 पैरा स्पेशल फोर्सेज के एक बहादुर अधिकारी थे। उनका जन्म 13 जनवरी 1978 को हरियाणा के रोहतक में हुआ था, लेकिन उनका पैतृक गांव मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रासना में है। मेजर मोहित की सबसे बहादुरी भरी कहानी 2004 की उस साहसिक ऑपरेशन की है, जब उन्होंने खुद को आतंकवादी के रूप में छिपाकर हिजबुल मुजाहिदीन के गढ़ में घुसपैठ की और दो खूंखार आतंकियों को मार गिराया। यह घटना जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले (कश्मीर से 50 किमी दक्षिण) में घटी थी।

    और पढ़ें