23 मार्च 1931…, यह तारीख सुनते ही हर भारतीय के मन में भगत सिंह के बलिदान का चित्र उभर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस रात भारत के इस अमर क्रांतिकारी ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमा, उसके बाद अंग्रेजों ने ऐसा क्या किया, जिसे दशकों तक लोगों की नजरों से छिपाकर रखा गया?
यह कहानी सिर्फ एक फांसी की नहीं, बल्कि उस क्रूरता की है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया था। अंग्रेजी हुकूमत ने केवल भगत सिंह की जान ही नहीं ली, बल्कि उनके निर्जीव शरीर तक से ऐसा व्यवहार किया, जो कोई जानवरों के साथ भी करने से पहले हजार बार सोचे। आखिर उस रात लाहौर सेंट्रल जेल के अंदर क्या हुआ था? क्यों अंग्रेज अधिकारियों ने इतनी जल्दबाजी दिखाई? आखिर क्यों भगत सिंह के पार्थिव शरीर के साथ ऐसी क्रूरता की गई? इस सवाल का जवाब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे दर्दनाक अध्याय में छिपा है।
और पढ़ें










