15 जून 2020 को, पूर्वी लद्दाख में ऊंचाई वाली गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं में झड़प हुई। यह चार दशकों से ज्यादा समय में हुई सबसे भयंकर झड़प थी। सैनिकों ने पत्थरों, रॉड और तात्कालिक उपलब्ध हथियारों से यह लड़ाई लड़ी। पर मुख्य बात यह रही कि दोनों तरफ से भयंकर हथियार होने के बाद भी कोई गोली नहीं चली। यह 1993 और 1996 में हुए कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग एग्रीमेंट का नतीजा था, जिसमें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हथियारों के प्रयोग न करने पर दोनों देश सहमत हुए थे।
इस टकराव ने एक विचित्र प्रश्न खड़ा किया : क्या विश्व में सभी युद्ध ऐसे ही लड़े जा सकते हैं, संयमित, तात्कालिक और नियंत्रित? गलवान झड़प ने सुझाव दिया कि विशेष स्थिति में भी तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसने यह भी बताया कि ऐसी स्थितियां कितने कम पर कोमल होती हैं, खासकर परमाणु हथियारों वाले शत्रुओं के बीच।
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