24 जून 1564 को नरराई नाला (वर्तमान जबलपुर) की संकरी घाटी में एक ऐसी घटना घटी, जिसने इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया, जब रानी दुर्गावती ने मुगलों की कैद में जाने से बेहतर अपनी जान देना चुना। एक घायल रानी ने, चारों ओर दुश्मनों से घिरने के बाद भी झुकने से इनकार कर दिया। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे उन्होंने पराजय के क्षण में भी अपना भाग्य खुद लिखा?
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