अरावली की पथरीली चट्टानों में आज भी एक वीर योद्धा की शौर्य गाथा गूंज रही है। यह गाथा है एक ऐसे वीर राजा की, जिसने वैभव से भरे महलों को छोड़कर, जंगलों को अपना घर बनाया। वह भी सिर्फ राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए। यह शौर्य गाथा है, मेवाड़ के राजा वीर महाराणा प्रताप की।
हल्दीघाटी के युद्ध (1576) में महाराणा प्रताप की छोटी सी सेना ने मुगल आक्रांता अकबर की विशाल सेना के सामने वीरता से युद्ध किया। हजारों मुगल सैनिक मारे गए। लेकिन मुगलों के अपेक्षा प्रताप की सेना आधी भी नहीं थी। जिसके चलते महाराणा प्रताप ने मुगल सेना के साथ गुरिल्ला युद्ध करने की रणनीती बनाई, इसके लिए उन्हें अरावली की पहाड़ियों पर अपनी सेना व परिवार के साथ शरण लेनी पड़ी।
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