दिसंबर 1992 की शुरुआत में राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन पूरे देश में अपने चरम पर पहुंच चुका था। लंबे समय से चले आ रहे इस आंदोलन ने लाखों हिंदू श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया था। देश के कोने-कोने से कारसेवक के रूप में आम लोग, भक्त और तमाम हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अयोध्या की ओर उमड़ पड़े थे। विशेष रूप से कारसेवकों की भारी भीड़ अयोध्या में जमा हो रही थी। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ताओं ने कारसेवा के लिए आ रहे देश भर के लाखों हिंदुओं के लिए खाना, पानी, दवा, ये सब उपलब्ध कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
इस दौरान 6 दिसंबर 1992 को वहां मौजूद विवादित ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के मात्र चार दिन बाद, 10 दिसंबर 1992 को तत्कालीन कांग्रेसी प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत प्रतिबंध लगा दिया।
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