एक सर्दी की दोपहर, 30 दिसंबर 1906 को, ढाका एक बांटने वाले राजनीतिक विचार का जन्मस्थान बना, जिसे ब्रिटिश साम्राज्य का समर्थन प्राप्त था। मोहम्मडन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर, औपचारिक भाषणों के बीच, ऑल-इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।

इसके मुख्य मेजबान ढाका के नवाब सलीमुल्लाह ने इस संगठन को ‘हिंदू वर्चस्व’ के खिलाफ एक जरूरी बचाव के तौर पर बनाया। आगा खान ने इसकी लीडरशिप स्वीकार की। हॉल के बाहर, बंगाल वैसा ही था, जैसा हमेशा से था, हिंदू और मुसलमान सड़कें, बाज़ार और रोजी-रोटी शेयर करते थे। लेकिन अंदर, एक नया सिद्धांत अपनाया गया कि मुसलमानों की राजनीतिक सुरक्षा के लिए अलगाव और श्रेष्ठता जरूरी है। 1905 के बंटवारे के बाद मुस्लिम-बहुसंख्यक पूर्वी बंगाल की नई राजधानी बने ढाका को चुना गया।
पढ़िए यह कहानी कि कैसे अलग चुनावी व्यवस्था के एक प्रयोग ने हिंदुओं के खिलाफ 120 साल का भेदभाव पैदा किया।
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