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  • शिक्षा के माध्यम से लोगों को प्रभावित करना : एंथनी फ्रांसिस शर्मा की स्मार्ट ‘गॉस्पेल’ रणनीति

    शिक्षा के माध्यम से लोगों को प्रभावित करना : एंथनी फ्रांसिस शर्मा की स्मार्ट ‘गॉस्पेल’ रणनीति

    नेपाल के ऊंचे पहाड़ों में, जहां हिंदू धर्म को प्रभुत्व था और धर्म बदलना कानून के विरुद्ध था, एंथनी फ्रांसिस शर्मा ने स्कूलों का प्रयोग करके लोगों को चुपचाप क्राइस्ट के पास लाने का काम किया।

    12 दिसंबर, 1937 को गोरखा जिले के एक गरीब हिंदू परिवार में जन्म लेने वाला एंथनी फ्रांसिस शर्मा ने साबित किया हैं कि कैसे जेसुइट स्कूल गॉस्पेल शेयर (ईसाई धर्म का संदेश (गॉस्पेल) दूसरों तक पहुंचाना या बताना)। करने के गुप्त अस्त्र बन गए। उसने लोगों को सीख देकर अपनी ओर खींचा और विश्वास के सबक भी सिखाए। उसका जीवन हमें बताता है, शिक्षा, जीसस का मैसेज वहां भी फैला सकती है, जहां इस पर रोक है।

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  • ईसा मसीह की जगह भगवान लुंगकित्सुंगबा के नाम पर नागालैंड में फैलाया ईसाइयत : 88% ईसाई आबादी के पीछे का सच

    ईसा मसीह की जगह भगवान लुंगकित्सुंगबा के नाम पर नागालैंड में फैलाया ईसाइयत : 88% ईसाई आबादी के पीछे का सच

    नागालैंड में जब पहली बार ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण करवाया, तो ईसा मसीह का जिक्र तक नहीं किया। धर्म परिवर्तन करवाया गया, नागाओं के सबसे बड़े भगवान लुंगकित्सुंगबा (Lungkitsungba) के नाम पर।

    चर्च, मतलब यीशु दा मंदिर, पास्टर को कहो पापा जी, जिंगल बेल्स कुछ और नहीं, ‘येशु दी बल्ले-बल्ले है’, पंजाब में जो आज चल रहा है, नागालैंड में भी बिल्कुल वही सब किया गया था वर्ष 1872 में, 153 साल पहले।

    पंजाबियत का चोला ओढ़कर आज पंजाबी समाज में मिशनरी घुसपैठ कर रहे हैं। इसी पैटर्न पर नागालैंड में नागाओं की आस्था और परंपराओं को साथ रखकर शुरुआती धर्मांतरण किया गया। 

    इन आंकड़ों पर गौर कीजिए : सबसे पहले नागा शख्स के धर्म-परिवर्तन के डेढ़ शताब्दी बाद 2011 की जनगणना के अनुसार वहां की जनसंख्या में 88% ईसाई हैं। 140 वर्ष से कम समय में 1 मात्र ईसाई नागरिक से बढ़कर अब 1739651 अब चर्च की शरण में हैं।

    मेरा यशु यशु’ के वायरल मीम की बाढ़ में बहकर पंजाब की डेमोग्राफी भी 88% ईसाई आबादी वाली न हो जाए, इसके लिए जरूरी है, जानना-समझना नागालैंड की कहानी।

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