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  • वर्ष 1813 : क्लैफम सेक्ट का षड्यंत्र, मिशनरी घुसपैठ और सदा के लिए बदल गई भारत की डेमोग्राफी

    वर्ष 1813 : क्लैफम सेक्ट का षड्यंत्र, मिशनरी घुसपैठ और सदा के लिए बदल गई भारत की डेमोग्राफी

    • हिन्दुओं के सभी देवी-देवता अशुद्ध और पतित
    • इनके लकड़ी और पत्थर के बने देवता, देव नहीं बल्कि राक्षस
    • हिन्दुओं के सभी सिद्धांत और प्रथाएं सिर्फ ढोंग, सब के सब भ्रष्ट
    • इनकी सभी परंपराएं और विश्वास हास्यास्पद और अपमानजनक
    • हिन्दुओं की लोककथाएं और किंवदंतियां सभी कपट से भरे हुए
    • इसीलिए मूर्ति पूजा की समाप्ति हो और यह समाप्ति होगी ईसाई मजहब को फैलाकर, वो भी अंग्रेजी माध्यम से। हिन्दुओं की मुक्ति का एकमात्र उपाय यही है।

    ऊपर कोई कहानी नहीं लिखी गई है। हर एक वाक्य इतिहास में दर्ज है। ऐसा इतिहास, जिसके दम पर भारत में ईसाई मिशनरियों के लिए जमीन तैयार की गई। ऐसा इतिहास, जिसका बीज बोया जैचरी मैकाले और उनके क्लैफम सेक्ट (Clapham Sect) के साथी ईसाइयों ने और फल पाने के लिए दस्तावेज पर मुहर लगाई गई साल 1813 में। 

    भारत में ईसाई मिशनरी क्यों भेजे जाएं, या किस रूप में भेजना चाहिए, वर्ष 1813 में लंदन की संसद में पास किए गए चार्टर एक्ट में सब दर्ज किया गया। आज जिस मैकाले की शिक्षा नीति पर इतनी चर्चा होती है, वो इसे तभी क्रियान्वित कर पाया, क्योंकि कभी उसके पिता जैचरी मैकाले ने हिन्दू घृणा के कारण अंग्रेजियत और ईसाइयत के प्रचार-प्रसार की नींव रखी थी।

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