1980 के दशक के बीच में, वर्ष 1985 के आसपास, रामानंद सागर रामायण के फुल-लेंथ टीवी सीरियल बनाने के लिए एक बोल्ड प्रस्ताव लेकर दूरदर्शन के दिल्ली ऑफिस गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्हें लगभग दो साल तक बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।

दूरदर्शन के अधिकारियों ने मजाक उड़ाते हुए इस सीरियल को पुराने जमाने का ‘मुकुट-मूंछ’ वाला कार्यक्रम बताकर खारिज कर दिया। उनके अनुसार यह सीरियल आधुनिक टेलीविजन के लिए सही नहीं था और उन्हें डर था कि इसको प्रसारित करने से सरकारी ब्रॉडकास्टर पर विवाद हो सकता है।
और पढ़ें
