1940 के दशक में भारत का स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था। जहां एक ओर क्रांतिकारी अंग्रेजों से लड़ते हुए, अपने प्राणों की आहुति दे रहे थे, तो दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में कुछ ऐसी कहानियां भी जन्म ले रही थीं, जिनकी चर्चा लंबे समय तक होती रही।
इन्हीं चर्चित घटनाओं में एक नाम बार-बार सामने आता है, जवाहर लाल नेहरू और भारत में अंतिम ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन की पत्नी एडविना का। जब देश स्वतंत्रता की लड़ाई के अंतिम दौर में था, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेक क्रांतिकारी अंग्रेजों से आरपार की लड़ाई लड़ते हुए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। यह क्रम आगे भी जारी था। लेकिन इस दौर में नेहरू और एडविना की निकटता चर्चा का विषय बन चुकी थी। तत्कालीन कई राजनेताओं, अधिकारियों और जीवनीकारों ने इन संबंधों का उल्लेख अपने संस्मरणों और किताबों में किया है, जिससे यह प्रेम कहानी इतिहास और राजनीति के बीच, एक विवादित अध्याय के रूप में दर्ज है।
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