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  • सुधारक या मुगल दूत? जब राजा राममोहन राय अकबर द्वितीय की पेंशन बढ़वाने इंग्लैंड गए

    सुधारक या मुगल दूत? जब राजा राममोहन राय अकबर द्वितीय की पेंशन बढ़वाने इंग्लैंड गए

    एक समाज सुधारक, जो सती प्रथा का कट्टर विरोधी है और भारतीय समाज को आधुनिक बनाने का सपना देखता है, अचानक दिल्ली के लाल किले से मुगल सम्राट का दूत बन जाता है। वह ब्रिटिश राजा के दरबार में जाकर न केवल सुधारों की बात करता है, बल्कि उन मुगलों की जेब भरने की गुहार लगाता है, जिनके पूर्वजों ने हिंदू मंदिर तोड़े और लाखों जानें लीं, साथ ही हिन्दू धर्म को पूरी तरह से मिटाने का प्रयास किया। 

    यह कोई काल्पनिक कथा नहीं, बल्कि 1831 की सच्ची घटना है, जब राजा राममोहन राय इंग्लैंड पहुंचे। कैसे एक सुधारक मुगल हितैषी बना, और क्यों बना, यह आज भी विवाद पैदा करता है। 

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