अगर त्रिपुरा पाकिस्तान का हिस्सा बन जाता, तो आज पूर्वोत्तर की तस्वीर कैसी होती? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चा मोड़ है भारतीय इतिहास का, जिसे मोड़ने वाली थीं एक युवा रानी कंचनप्रभा देवी। महाराजा बीर बिक्रम किशोर देवबर्मन की अचानक मौत, नाबालिग उत्तराधिकारी, महल के भीतर सत्ता की भूख और बाहर से पाकिस्तान समर्थित षड्यंत्र, सब मिलकर त्रिपुरा को भारत से दूर धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन रानी ने कहानी ही बदल दी।
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