क्या आप जानते हैं कि अपने ही देश में शरणार्थी बनने का दर्द क्या होता है? यह दर्द कश्मीरी पंडित जानते हैं। 19 जनवरी, 1990 की रात कश्मीरी हिंदुओं के जीवन में एक भयानक रात बनी हुई है, जब इस्लामिक आतंकवाद के एक प्लान्ड कैंपेन के जरिए, इस अल्पसंख्यक समुदाय कश्मीरी पंडितों को बंदूक की नोक पर भगा दिया गया। उन्हें भयानक हिंसा का सामना करना पड़ा जिसने उन्हें अपनी ही जमीन पर शरणार्थी बना दिया। कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा, उनके दुख और उनके संघर्ष के इतिहास को भूलना खुद के साथ अन्याय होगा।
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