मोतीलाल नेहरू ने कभी धन-दौलत, पश्चिमी सूट और शाही आराम वाली जिंदगी जी थी। फिर जलियांवाला बाग की आवाजें उन तक पहुंचीं। धीरे-धीरे विलासिता की जगह त्याग ने ले ली।
1861 में जन्मे मोतीलाल नेहरू का जीवन शुरू में सुख-सुविधाओं से भरा नहीं था। जब वे अभी छोटे ही थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था और परिवार को आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। अपनी लगन और कड़ी मेहनत से मोतीलाल ने कानून की पढ़ाई की और धीरे-धीरे इलाहाबाद की अदालतों में अपनी साख बनाई।
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