भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में, 1857 के विद्रोह के 15 साल बाद, एक खूनी घटना हुई, जिसने ब्रिटिश राज का क्रूर चेहरा दुनिया के सामने ला दिया। यह कहानी उन 66 बहादुर नामधारी (कूका) सिखों की है, जो जनवरी 1872 में शहीद हुए थे। उन्होंने निश्चित मौत का सामना करते हुए भी ‘गौ रक्षा’ के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। हालांकि, आज भी कई सवाल उठते हैं, इतिहास में ‘मालेरकोटला नरसंहार’ के नाम से बदनाम इस घटना के ये 66 शहीद आखिर कौन थे? वे किस बड़े आंदोलन का हिस्सा थे, और उन्हें इतनी बेरहमी से क्यों मारा गया?
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