हर साल, जैसे ही 17 जून आता है, हम ‘मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए विश्व दिवस’ जैसे नारे लगाते हैं। जब धरती अपनी ताकत खोकर बंजर जमीन में बदलने लगती है, तो हम चिंतित हो जाते हैं।
यह सच है कि हमारे देश में भी, कई इलाके मरुस्थलीकरण की चपेट में आ रहे हैं और बेकार और बंजर जमीन में बदलते जा रहे हैं। लेकिन, हम उन बंजर जमीनों को किस नजर से देख रहे हैं? हम अपनी सूझ-बूझ से उन्हें राष्ट्रीय विकास के लिए कैसे बदल रहे हैं?
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