भारत के पहले आईआईटी बनने के पीछे एक रोचक कहानी है। जो स्वाधीनता संग्राम के संघर्ष को उसकी मिट्टी से जोड़ती है। जहां कभी ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के वीर सपूतों पर अत्याचार किए, उनकी आवाज को दबाने का असफल प्रसास किया, जिस इमारत में कभी स्वतंत्रता सेनानियों की बेड़ियों की आवाज गूंजती थी, वहीं कुछ वर्षों बाद भविष्य के इंजीनियरों के सपनों ने आकार लेना शुरू किया।
यह केवल एक आईआईटी के स्थापना की कहानी नहीं, बल्कि गुलामी के प्रतीकों को राष्ट्रनिर्माण के सबसे बड़े केंद्र में बदल देने का ऐतिहासिक काम भी था। यही कारण है कि आईआईटी खड़गपुर के बनने के इतिहास को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से अलग नहीं किया जा सकता।
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