क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक छोटी बच्ची अपनी मां का चेहरा पहली बार किसी पुरानी तस्वीर में देखती है और उसे पता चलता है कि वह कभी अपनी मां को जान भी नहीं पाई? वैलेरी वेनबर्ग का जीवन ऐसी ही एक दर्दनाक सच्चाई है, जहां बचपन परिवार से छीन लिया गया, भाई-बहन संस्थानों में मर गए, और फिर भी वह जीवित रहीं। यह कहानी ऑस्ट्रेलिया के स्टोलन जेनरेशंस की उस क्रूर नीति की गवाही है जिसने हजारों स्वदेशी बच्चों को उनकी जड़ों से उखाड़ फेंका।
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