19 अक्टूबर, 1952 को मद्रास के मायलापुर में बुलुसु संबमूर्ति के घर पर एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगु बोलने वाले लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन आरंभ किया। श्रीरामुलु की मांग पक्की थी और तब किसी ने यह अंदाजा नहीं लगाया था कि यह भारत के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से बदल देगा। उस समय की लीडरशिप भी यह अंदाजा नहीं लगा पाई थी कि यह सत्याग्रह आधुनिक भारतीय इतिहास में एक बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल मचा देगा।
और पढ़ें
