5,000 से भी ज़्यादा सालों से, स्वस्तिक भारतीय सभ्यता का एक ऐसा प्रतीक रहा है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है और पूरे उपमहाद्वीप में इसे खुशहाली, समृद्धि और शुभारम्भ का प्रतीक माना जाता है। यह निरंतरता का भी प्रतीक है, जिसका प्रयोग प्राचीन काल से लेकर आज तक बड़े स्तर पर होता आ रहा है।
हिंदुत्व परंपराओं में स्वस्तिक आज भी मंदिरों की दीवारों, घरों की चौखटों, पवित्र ग्रंथों, सिक्कों, वास्तुशिल्प के नमूनों और पूजा-पाठ की वस्तुओं पर दिखाई देता है।
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