16 मई, 1949 को भारत की संविधान सभा के अंदर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें सदस्यों से सरकार के इस फैसले को मंजूरी देने का आग्रह किया गया था कि भारत ‘कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस’ का हिस्सा बना रहेगा।
इस प्रस्ताव ने सभी को चौंका दिया। महज दो साल पहले, 1947 में भारत ने आखिरकार ब्रिटिश शासन से आजादी पाई थी और नेहरू ने एक ऐसे पूरी तरह से संप्रभु गणराज्य का वादा किया था जो औपनिवेशिक बोझ से मुक्त हो। फिर भी, अब वह एक ऐसे संगठन के साथ जुड़ाव बनाए रखने की वकालत कर रहे थे, जिसका जन्म ब्रिटिश साम्राज्य से हुआ था।
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