वर्ष 1910 के भूमकाल विद्रोह के दौरान एक ऐसा वीरतापूर्ण पल आया, जब बस्तर के घने जंगलों में जनजातीय नायक वीर गुंडाधुर के नेतृत्व में तीर-कमान और कुल्हाड़ी से लैस आदिवासी योद्धाओं ने ब्रिटिश सेना को घेर लिया। ब्रिटिश सेना के कैप्टन गेयर सहित अंग्रेज सैनिक जान बचाकर मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए। यह कोई लोककथा नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई है। कैसे बस्तर के नेतानार गांव में जन्में धुरवा जनजातीय समाज के युवक वीर गुंडाधुर ने ब्रिटिश साम्राज्य को सीधी चुनौती दी।
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