Author: Mahadhyuta

  • स्वामी रामानंद तीर्थ और बाल गंगाधर तिलक का खास रिश्ता: जब युवा व्यंकटेश ने तिलक की रैली में जाने के लिए छोड़ दी थी परीक्षा

    स्वामी रामानंद तीर्थ और बाल गंगाधर तिलक का खास रिश्ता: जब युवा व्यंकटेश ने तिलक की रैली में जाने के लिए छोड़ दी थी परीक्षा

    व्यंकटेश भवनराव खेड़गीकर, जिन्हें स्वामी रामानंद तीर्थ के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1903 को सिंदगी (जो अब कर्नाटक में है) में हुआ था। हर वर्ष इस दिन उनके भारत की आजादी की लड़ाई, हैदराबाद मुक्ति आंदोलन और हिंदुओं के उत्थान में दिए गए योगदान को याद किया जाता है।

    एक रोचक और कम जाना-पहचाना तथ्य यह है कि स्वामी रामानंद तीर्थ का जीवन बहुत ही कम उम्र से ही लोकमान्य तिलक के राष्ट्रवाद और नेतृत्व के विचारों से प्रभावित रहा। हालांकि उन्हें गांधी के असहयोग आंदोलन से भी प्रेरणा मिली, फिर भी उन्होंने खासतौर पर पूर्व हैदराबाद राज्य में हिंदुओं की शिक्षा और उत्थान पर ध्यान केंद्रित किया।

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  • 16 बिंदुओं में जानें, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को दी वैश्विक पहचान

    16 बिंदुओं में जानें, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को दी वैश्विक पहचान

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी पहली बार 10 अक्टूबर 1977 को गूंजी थी। उस समय भारत के विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न्यूयॉर्क स्थित यूएन के मंच से हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण दिया। उन्होंने आतंकवाद, नस्लवाद और गुटनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। तीन मिनट के इस भाषण के अंत में पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह क्षण हिन्दी भाषा की वैश्विक पहचान का अहम मील का पत्थर बना।

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