16 बिंदुओं में जानें, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को दी वैश्विक पहचान

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी पहली बार 10 अक्टूबर 1977 को गूंजी थी। उस समय भारत के विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न्यूयॉर्क स्थित यूएन के मंच से हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण दिया। उन्होंने आतंकवाद, नस्लवाद और गुटनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। तीन मिनट के इस भाषण के अंत में पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह क्षण हिन्दी भाषा की वैश्विक पहचान का अहम मील का पत्थर बना।

संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएँ अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, रूसी, स्पैनिश, चीनी (मंदारिन) और अरबी हैं। इसके बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी ने हिन्दी में भाषण देकर स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी भाषा और संस्कृति के सम्मान से समझौता नहीं करता। उनका यह निर्णय विश्व मंच पर हिन्दी के गौरव, भारतीय आत्मसम्मान और भाषाई स्वाभिमान का सशक्त प्रतीक बन गया।इस लेख में हम अटल जी के उसी ऐतिहासिक संबोधन से जुड़े महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलुओं को 16 बिंदुओं में प्रस्तुत कर रहे हैं।

  1. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में उद्घाटन वक्तव्य में वाजपेयी ने  भारत की ओर से सकारात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए कहा कि “मैं भारत की जनता की ओर से राष्ट्रसंघ के लिए शुभकामनाओं का संदेश लाया हूँ।
  2. उन्होंने भारत की विदेश नीति और दृष्टिकोण रखते हुए “वसुधैव कुटुम्बकम्” (The World is One Family) की भारतीय अवधारणा को प्रमुखता दी। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि- 
    • भारत प्राचीन काल से ही किसी सैन्य गुट या संगठन से सक्रिय रूप से नहीं जुड़ा रहा है।
    • भारत ने हमेशा यह मान्यता रखी है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।
    • यही कारण है कि भारत की विदेश नीति अहिंसा, शांति और सहयोग की नींव पर टिकी हुई है।

इसके बाद साल 2023 के G-20 सम्मेलन में भारत ने अपना ध्येय वाक्य वसुधैव कुटुम्बकम को रखा था।

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  1. अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि “मैं संयुक्त राष्ट्र में नया हूँ, लेकिन भारत नया नहीं है। भारत इस संगठन के जन्मकाल से ही इससे सक्रिय रूप से जुड़ा रहा है। हमारी नीति गुटनिरपेक्षता की रही है। भारत सभी देशों से शांति, गुटनिरपेक्षता और मैत्री के आधार पर दृढ़ता से जुड़ा हुआ है।”
  2. भारत सब देशों से मैत्री चाहता है और किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं चाहता। भारत न तो आण्विक शस्त्र शक्ति है और न बनना ही चाहता है।
  3. अफ्रीका में चुनौती स्पष्ट है, प्रश्न ये है कि किसी जनता को स्वतंत्रता और सम्मान के साथ रहने का अनपरणीय अधिकार है या रंग भेद में विश्वास रखने वाला अल्पमत किसी विशाल बहुमत पर हमेशा अन्याय और दमन करता रहेगा।
  4. सामान्य नागरिक की गरिमा और विकास पर फोकस करते हुये अटल जी ने कहा  कि “आम आदमी की प्रतिष्ठा और प्रगति मेरे लिए कहीं अधिक महत्व रखती है।”
  5. 1975-77 की इमरजेंसी के बाद 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी थी, जिसने इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार को हराया था। उसको याद करते हुए अटल जी ने कहा कि “ भारत में मूलभूत मानव अधिकार पुन: प्रतिष्ठित हो गए हैं, जिस भय और आतंक के वातावरण ने हमारे लोगों को घेर लिया था वह अब दूर हो गया है।”  अब ऐसे संवैधानिक कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लोकतंत्र और मूलभूत आजादी का दोबारा कभी उल्लंघन नहीं हो” 
  6. आखिरी में कहा- मैं भारत की ओर से इस महासभा को आश्वासन देना चाहता हूं कि हम एक विश्व के आदर्शों की प्राप्ति, मानव कल्याण और उसके गौरव के लिए त्याग और बलिदान की बेला में कभी पीछे नहीं रहेंगे। जय जगत…धन्यवाद।
  7. संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी की परंपरा को आगे बढ़ाते भारतीय नेताओं के भाषण 1 2
    • अटल बिहारी बाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए बाद में पी. वी. नरसिम्हा राव (1988), सुषमा स्वराज (2017) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (2019) ने भी हिन्दी में संबोधन किया।  वहीं बीजेपी नेता स्मृति ईरानी भी संयुक्त राष्ट्र महिला कॉन्फ्रेंस में महिला सशक्तिकण को लेकर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने हिन्दी भाषा का प्रयोग किया था। ये भी भारत की भाषाई परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी कदम था जिसका पूरी दुनिया ने सम्मान किया था।
  8. हिंदी को वैश्विक मंच पर ले जाने का सफर: भाषण से फंडिंग तक
    • अटल बिहारी वाजपेयी  के इस पहल ने आगे चलकर भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। इसी दिशा में भारत ने 2024 में 1.16 मिलियन अमेरिकी डॉलर का फंड संयुक्त राष्ट्र को दिया, जिसका उपयोग हिंदी वेबसाइट सामग्री, समाचार बुलेटिन और शैक्षणिक कार्यक्रमों के विस्तार में किया गया। यह कदम हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम साबित हुआ। 
  9. 14 सितंबर 1949: हिन्दी को मिला राजभाषा का सम्मान
    • भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि हिन्दी, देवनागरी लिपि में, भारत की राजभाषा होगी। संविधान के अनुच्छेद 343 में इसका स्पष्ट प्रावधान किया गया। यही कारण है कि हर वर्ष 14 सितंबर को पूरे देश में हिन्दी दिवस मनाया जाता है, ताकि हिन्दी भाषा की संवैधानिक मान्यता और उसके महत्व को याद किया जा सके।
  10. विदेशों में तेजी से बढ़ रही हिन्दी की लोकप्रियता
    • भारत की आर्थिक प्रगति के चलते विदेशों में हिन्दी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अमेरिका में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी का हिन्दी कार्यक्रम 1998 में 12 छात्रों से बढ़कर 2017 में 80 तक पहुँच गया और 100 से अधिक स्कूल इसे पढ़ा रहे हैं। टेक्सास और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान भी हिन्दी पढ़ाते हैं, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भाषा माना है। यूरोप में डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय समेत कई जगहों पर रुचि बढ़ रही है।
  11. जर्मन विद्वान एल्मार रेनर: भारत में हिन्दी सीखकर अब कोपेनहेगन में अध्यापन 
    • एल्मार रेनर एक जर्मन विद्वान और हिन्दी प्रेमी हैं जिन्होंने म्यूनिख विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारत आकर केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा और दिल्ली से हिन्दी तथा उसके शिक्षण-विधि का अध्ययन किया। हिन्दी के प्रति गहरी रुचि के चलते उन्होंने इसे न केवल स्वयं सीखा बल्कि शिक्षण को भी अपना पेशा बनाया। वे 2013 से डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में हिन्दी और संस्कृत पढ़ा रहे हैंउन्होंने दक्षिण एशियाई अध्ययन के छात्रों के लिए विशेष रूप से एक हिन्दी पाठ्यपुस्तक विकसित की है, जिसमें अकादमिक शैली और तत्सम शब्दों की विशेषताओं पर ध्यान दिया गया है।
  12. विश्व हिन्दी सम्मेलन से हिन्दी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार 3
    • विश्व हिन्दी सम्मेलन कई बार भारत से बाहर भी आयोजित हुआ है, जिससे हिन्दी की प्रवासी जड़ों और वैश्विक पहचान को बल मिला है। दूसरा सम्मेलन 1976 में मॉरीशस के पोर्ट लुई में हुआ और चौथा सम्मेलन भी 1993 में वहीं आयोजित किया गया। पाँचवाँ 1996 में पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिदाद और टोबैगो), छठा 1999 में लंदन (यूके), सातवाँ 2003 में पारामारिबो (सूरीनाम), आठवाँ 2007 में न्यूयॉर्क (अमेरिका), नौवाँ 2012 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका), ग्यारहवाँ 2018 में मॉरीशस और बारहवाँ 2023 में फिजी में संपन्न हुआ। इन सम्मेलनों ने न केवल विद्वानों, लेखकों और हिन्दी प्रेमियों को एक मंच पर जोड़ा, बल्कि यह भी दिखाया कि हिन्दी भारतीय मूल के समुदायों को वैश्विक स्तर पर कैसे जोड़ती है, खासकर उन देशों में जहाँ हिन्दी-प्रभावित भाषाएँ जैसे फिजी हिन्दी और कैरेबियाई हिंदुस्तानी बोली जाती हैं।
  13. दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में हिन्दी
    • हिन्दी वर्तमान में दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जिसके लगभग 609 मिलियन वक्ता हैं। अंग्रेज़ी (लगभग 1.5 अरब वक्ता) और मंदारिन चीनी (लगभग 1.1-1.2 अरब वक्ता) के बाद हिन्दी का स्थान आता है। यदि दुनिया की कुल आबादी लगभग 8 अरब मानी जाए तो हिन्दी बोलने वालों का प्रतिशत करीब 7-8% बैठता है।
  14. हिन्दी ने दिया दुनिया को शब्द और भाव 4 5 6
    • हिन्दी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। इसका इतिहास अत्यंत गहरा और लंबा है। विकास की यात्रा में हिन्दी ने न केवल स्वयं को समृद्ध किया है, बल्कि अनेक अन्य भाषाओं को भी शब्द और भाव दिए हैं। आज संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं में भी हिन्दी की झलक दिखाई देती है।
    • अंग्रेज़ी में Jungle, Pyjama, Bungalow, Shampoo, Juggernaut, Cashmere, Bangle, Thug, Chutney, Bandana, Mantra, Verandah, Dinghy, Chit, Punch, Cot, Loot, Cushy, Yoga और Nirvana जैसे शब्द सीधे  हिन्दी से आए हैं।
    • फ्रेंच में Aubergine, Cachemire, Carmin और Chacal जैसे शब्दों में हिन्दी और भारतीय भाषाओं का योगदान है।
    • स्पैनिश में भी Naranja, जिसका मूल संस्कृत शब्द ‘नारङ्ग’ (nāraṅga) है, इसका प्रमाण है कि हिन्दी और भारतीय भाषाओं की गूंज विश्व की अनेक भाषाओं में सुनाई देती है।
    • चीनी में (Chànà) (Sanskrit के क्षण kṣaṇa से) 
  1. https://www.aajtak.in/india/news/story/smriti-irani-speech-in-un-general-assembly-women-empowerment-hathras-gangrape-case-1138989-2020-10-02 ↩︎
  2. https://ddnews.gov.in/pm-modis-address-in-un-said-reforms-in-global-institutions-are-necessary-success-of-humanity-lies-in-collective-power ↩︎
  3. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F25246%2F10th_World_Hindi_Conference= ↩︎
  4. https://en.wiktionary.org/wiki/Category:French_terms_derived_from_Sanskrit ↩︎
  5. https://thebetterindia.com/57965/english-words-borrowed-from-hindi/ ↩︎
  6. https://studyinternational.com/news/english-words-from-hindi/ ↩︎