इतिहास में युद्ध आमतौर पर तलवार, बंदूक और रणभूमि में जीत-हार की कहानियों के लिए याद किए जाते हैं। लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो युद्ध के बीच भी इंसानियत को सबसे ऊपर रखती हैं। सिख इतिहास में भाई कन्हैया जी की कहानी ऐसी ही मिसाल है।
सन् 1648 में सियालकोट जिले के सोधरा क्षेत्र में जन्मे भाई कन्हैया जी का मन सांसारिक जीवन में अधिक नहीं लगा। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था। कम उम्र में घर छोड़कर वह साधु-संतों के साथ घूमने लगे। वह आध्यात्मिक शांति और जीवन के वास्तविक अर्थ की तलाश में थे।
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