जब 1980 के दशक की शुरुआत में ईसाई धर्म का प्रचारक माइकल डिसूजा तमिलनाडु आए, तो उन्हें जल्दी ही एक बात समझ में आ गई। वह बात, जो चर्च सदियों से जानता तो था लेकिन शायद ही कभी खुलकर मानता था। वह यह कि भारत को भारत के लोगों को टकराव से नहीं बदला जा सकता। भारतीय लोगों की परंपराएं बहुत पुरानी थीं, उनकी सभ्यता की जड़ें बहुत गहरी थीं, उनकी सांस्कृतिक जुड़ाव बहुत मजबूत था।
और पढ़ें
