एक साल पहले, 22 अप्रैल 2025 को, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी के शांत घास के मैदान एक खौफनाक जगह में बदल गए थे, जब पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादियों के एक क्रूर आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। यह एक सुनियोजित हमला था, पहले हिंदू पुरुषों को अलग किया गया और फिर उनकी पत्नियों, बच्चों और परिवारों के सामने ही उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई।
लेकिन भारत न तो इसे भूला, और न ही उन्हें माफ किया। इसके बाद के हफ्तों में, एक दृढ़ और व्यवस्थित जवाबी कार्रवाई ने आकार लेना आरम्भ किया, जिसका नतीजा ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम के एक बेहद सटीक आतंकवाद-रोधी अभियान के रूप में सामने आया। इस अभियान ने यह सुनिश्चित किया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूढ़ निकाला जाए और उन्हें सजा दिलाई जाए। आज, हम विस्तार से बता रहे हैं कि यह पूरा ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया गया और इस क्रूर हमले के दोषियों को कैसे सजा के कटघरे तक पहुंचाया गया।
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