महाराष्ट्र में दक्कन के पठारों के बीच एक लग्जरी ट्रेन दौड़ती है ‘डेक्कन क्वीन’ यानी दक्कन की रानी। अंग्रेजों ने मुंबई से पुणे के बीच सफर को आरामदायक और आनंदमयी बनाने के लिए 1 जून 1930 को इसे आरम्भ किया था।
लेकिन क्या आप जानते हैं पहाड़ों के बीच जिस खूबसूरत रेलमार्ग पर होकर यह ट्रेन गुजरती है, उसके बनने के पीछे एक ऐसी दर्दनाक कहानी है, जिसे इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया। पहाड़ों के बीच स्थित भोर घाट दर्रा से होकर गुजरने वाली इस रेलवे लाइन का निर्माण कोई साधारण कार्य नहीं था, बल्कि भारतीयों का मौन बलिदान था, जिसने अंग्रेजों के आराम की नींव रखी।
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