‘जहां भी जुल्म होगा, वहां क्रांति जरूर उठेगी!’ यह एक अटल सत्य है। इतिहास के पन्नों में दर्ज हर क्रांति का जन्म भूख, अपमान और अन्याय से ही हुआ है। जब 1946 में फरीदकोट रियासत में जुल्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया, तब एक ऐसे योद्धा की कहानी सामने आई, जो लोगों की आवाज बना और जिसने उस जुल्म का डटकर मुकाबला किया। यह कहानी है ज्ञानी जैल सिंह के जीवन-संघर्ष की।
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