क्या आप जानते हैं कि अपने ही देश में शरणार्थी बनने का दर्द क्या होता है? यह दर्द कश्मीरी पंडित जानते हैं। 19 जनवरी, 1990 की रात कश्मीरी हिंदुओं के जीवन में एक भयानक रात बनी हुई है, जब इस्लामिक आतंकवाद के एक प्लान्ड कैंपेन के जरिए, इस अल्पसंख्यक समुदाय कश्मीरी पंडितों को बंदूक की नोक पर भगा दिया गया। उन्हें भयानक हिंसा का सामना करना पड़ा जिसने उन्हें अपनी ही जमीन पर शरणार्थी बना दिया। कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा, उनके दुख और उनके संघर्ष के इतिहास को भूलना खुद के साथ अन्याय होगा।
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टीपू सुल्तान का नायक के रूप में महिमामंडन क्यों है हिंदुओं के खिलाफ उनके अपराधों को नजरअंदाज करना?
5 नवंबर, 2025 को, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से 10 नवंबर को एक भव्य टीपू जयंती समारोह आयोजित करने का आग्रह किया और राज्य सरकार पर पिछले दो वर्षों से इस आयोजन की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने नेता सी. अब्दुल रहमान ने टीपू सुल्तान को देशभक्त बताया और चेतावनी दी कि अगर यह समारोह आयोजित नहीं किया गया तो कांग्रेस नेताओं को इस्तीफा दे देना चाहिए।
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