भारत की आजादी के समय, जब पूरा देश गुलामी की जंजीरों से मुक्त होकर एक नए भविष्य का सपना देख रहा था, तब हैदराबाद रियासत का निजाम मीर उस्मान अली खान भारत से अलग होकर इस्लामी राष्ट्र बनाने का सपना देख रहा था। यह वही हैदराबाद था, जहां की लगभग 84 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू थी, लेकिन सत्ता, शासन और ताकत पूरी तरह निजाम और उसकी इस्लामिक रजाकार सेना के हाथों में थी। आजादी के बाद भी यहां भारतीय तिरंगे पर प्रतिबंध था और भारत माता का नाम लेना अपराध माना जाता था।
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