Tag: Indian History

  •  एक किताब और हिल गया साम्राज्य : कैसे वीर सावरकर की 1857 वाली पुस्तक ब्रिटिश राज के लिए बन गई खतरा?

     एक किताब और हिल गया साम्राज्य : कैसे वीर सावरकर की 1857 वाली पुस्तक ब्रिटिश राज के लिए बन गई खतरा?

    इतिहास में कई ऐसी किताबें हुई हैं, जिन्होंने सरकारों को असहज कर दिया था। लेकिन एक किताब ऐसी भी थी जिसे छपने से पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया गया। यह किताब लिखी गई थी, विनायक दामोदर वीर सावरकर (28 मई 1883- 26 फरवरी 1966) द्वारा। उन्हें वीर सावरकर या स्वातंत्र्यवीर वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी, विचारक, लेखक, कवि और हिंदुत्व विचारधारा के प्रणेता थे। 

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  • महान योद्धा ही नहीं, महिला सशक्तिकरण के भी नायक थे मल्हारराव होल्कर : जानिए इस पहलू से जुड़ी महिला अधिकार की प्रेरक कहानी

    महान योद्धा ही नहीं, महिला सशक्तिकरण के भी नायक थे मल्हारराव होल्कर : जानिए इस पहलू से जुड़ी महिला अधिकार की प्रेरक कहानी

    भारतीय इतिहास में मल्हारराव होल्कर को एक महान मराठा सेनानायक और होल्कर वंश के प्रवर्तक के रूप में याद किया जाता है। 18वीं शताब्दी में जब मराठा साम्राज्य उत्तर और मध्य भारत में अपनी शक्ति का विस्तार कर रहा था, तब उन्होंने अपनी वीरता, सैन्य रणनीति और दूरदर्शिता से इस विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

    लेकिन मल्हारराव होल्कर की कहानी केवल युद्धों और विजय की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी भी है, जिसने उस दौर में महिलाओं की क्षमता और अधिकारों को पहचाना, जब समाज में उन्हें सार्वजनिक जीवन से लगभग दूर रखा जाता था। तो आइए, जानते हैं मल्हारराव होल्कर के उस पहलू को भी, जो महिला सशक्तिकरण से जुड़ा है।

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  • सिर्फ तलवार से नहीं, कलम से भी लड़े थे संभाजी महाराज : ‘बुद्धभूषणम्’ जैसा महान ग्रंथ लिखने वाले योद्धा की अनसुनी कहानी

    सिर्फ तलवार से नहीं, कलम से भी लड़े थे संभाजी महाराज : ‘बुद्धभूषणम्’ जैसा महान ग्रंथ लिखने वाले योद्धा की अनसुनी कहानी

    सह्याद्रि की घाटियों में एक ऐसा नाम गूंजता है, जिसे इतिहास में प्रायः एक प्रखर योद्धा के रूप में स्मरण किया जाता है, वह नाम है, संभाजी महाराज का। अधिकांश लोग उन्हें महान छत्रपति और मुगलों के विरुद्ध लड़ने वाले वीर योद्धा के रूप में जानते हैं। 

    लेकिन इतिहास के पन्नों में संभाजी महाराज की एक और पहचान छिपी है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। यह है एक महान संस्कृत विद्वान की। संभाजी महाराज केवल रणभूमि के योद्धा ही नहीं थे, बल्कि वह एक ‘संस्कृत योद्धा’ भी थे, ऐसे विद्वान शासक, जिनकी कलम उतनी ही प्रखर थी, जितनी कि उनकी तलवार। उन्होंने संस्कृत और ब्रज भाषा में महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे। जिसमें से ‘बुद्धभूषणम्’ उनकी प्रमुख रचना है। यह उनके गहन अध्ययन और बौद्धिक क्षमता का प्रमाण है। यही कारण है कि इतिहास में संभाजी महाराज को केवल वीरता से नहीं, बल्कि उनको विद्वता से भी समझने की आवश्यकता है।

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  • क्या है ‘घास की रोटी’ खाने वाली सच्चाई? जानिए अरावली में छिपा महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा रहस्य!

    क्या है ‘घास की रोटी’ खाने वाली सच्चाई? जानिए अरावली में छिपा महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा रहस्य!

    अरावली की पथरीली चट्टानों में आज भी एक वीर योद्धा की शौर्य गाथा गूंज रही है। यह गाथा है एक ऐसे वीर राजा की, जिसने वैभव से भरे महलों को छोड़कर, जंगलों को अपना घर बनाया। वह भी सिर्फ राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए। यह शौर्य गाथा है, मेवाड़ के राजा वीर महाराणा प्रताप की। 

    हल्दीघाटी के युद्ध (1576) में महाराणा प्रताप की छोटी सी सेना ने मुगल आक्रांता अकबर की विशाल सेना के सामने वीरता से युद्ध किया। हजारों मुगल सैनिक मारे गए। लेकिन मुगलों के अपेक्षा प्रताप की सेना आधी भी नहीं थी। जिसके चलते महाराणा प्रताप ने मुगल सेना के साथ गुरिल्ला युद्ध करने की रणनीती बनाई, इसके लिए उन्हें अरावली की पहाड़ियों पर अपनी सेना व परिवार के साथ शरण लेनी पड़ी। 

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  • भारत के महान वीर योद्धा सरदार हरिसिंह नलवा, जिनके खौफ से अफगानी कट्टरपंथी पहनने लगे थे सलवार

    भारत के महान वीर योद्धा सरदार हरिसिंह नलवा, जिनके खौफ से अफगानी कट्टरपंथी पहनने लगे थे सलवार

    अहमदशाह अब्दाली, महमूद गजनवी जैसे क्रूर इस्लामिक आक्रांताओं ने जिस धरती से आकर भारत में लूटपाट और निर्दोष हिंदुओं का नरसंहार किया, उसी  गांधार (अफगानिस्तान) की धरती पर एक भारतीय वीर की ऐसी कहानी छिपी है, जिसे वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास के पन्नों में दबा दिया। यह सच्ची कहानी एक ऐसे भारतीय शूरवीर की है, जिसके भय से कट्टरपंथी अफगानी पठान थर-थर कांपते थे। उसका खौफ इतना कि अफगानी पठान डर के मारे महिलाओं का सलवार पहने लगे थे।

    यह योद्धा कोई और नहीं, बल्कि महान भारतीय शासक महाराजा रणजीत सिंह के सेनापति सरदार हरि सिंह नलवा थे। जब उन्हें सीमांत इलाकों (खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान) का गवर्नर बनाया गया, तो डर के मारे कट्टरपंथी अफगान कबीलों ने अपनी इस्लामिक पहचान तक बदल डाली। हरि सिंह नलवा की यह कोई सामान्य सैन्य विजय नहीं थी, बल्कि यह वह दौर था, जब एक भारतीय योद्धा ने सिर्फ भूगोल ही नहीं, बल्कि शत्रुओं की संस्कृति तक को प्रभावित कर दिया था।

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  • “मुझे एक पुर्तगाली जहाज लाकर दो” : कैसे कटारी ने 36 घंटे में 450 साल की गुलामी से गोवा को मुक्त कराया

    “मुझे एक पुर्तगाली जहाज लाकर दो” : कैसे कटारी ने 36 घंटे में 450 साल की गुलामी से गोवा को मुक्त कराया

    15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी, गोवा परतंत्र था। गोवा 450 वर्ष से ज्यादा समय तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा। इस कारण कई वर्षों तक वहां विरोध प्रदर्शन, शांति मार्च और बॉर्डर पर छोटी-मोटी झड़पें हुईं।

    1961 के अंत तक तनाव बहुत बढ़ गया था। अब भारत ने 18-19 दिसंबर को गोवा, दमन और दीव को पुर्तगाली शासन से आजाद कराने के लिए तुरंत मिलिट्री एक्शन लिया।

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  • सुभाष चंद्र बोस ने सत्ता नहीं खोई, बल्कि उन्होंने सत्ता को ठुकराया था  

    सुभाष चंद्र बोस ने सत्ता नहीं खोई, बल्कि उन्होंने सत्ता को ठुकराया था  

    हम सभी जानते हैं कि सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस के एक सक्रिय सदस्य थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पार्टी के भीतर वह इतने लोकप्रिय थे कि महात्मा गांधी और पंडित नेहरू जैसे बड़े नेता भी उनसे असुरक्षित और भयभीत महसूस करते थे? खैर, यह लेख इतिहास के इसी पहलू को खंगालेगा, जिसमें हम आपको बताएंगे कि कैसे इन नेताओं के लिए स्वतंत्रता का मुद्दा तो पृष्ठभूमि में था, लेकिन असल में सत्ता की भूख ही वह अंतर्निहित शक्ति थी, जो उनके संघर्ष को आगे बढ़ा रही थी।

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  • मोरारजी देसाई : गांधीवाद  या राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़? वह ‘एक फोन कॉल’ जिसे इतिहास कभी माफ नहीं कर सकता!

    मोरारजी देसाई : गांधीवाद  या राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़? वह ‘एक फोन कॉल’ जिसे इतिहास कभी माफ नहीं कर सकता!

    आज, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसके पास परमाणु बम हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब इजराइल उसकी परमाणु शक्ति को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए तैयार था? इसके लिए, उन्होंने हमारी राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी, ‘R&AW’ से संपर्क किया। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा लिए गए एक फैसले ने… हमारे दुश्मन देश को और भी ज़्यादा मजबूत बना दिया। हां, यह एक कड़वी सच्चाई है जिसे इतिहास में कोई भी नकार नहीं सकता। 

    मोरारजी देसाई, छवि स्रोत : hindupost

    राजनीति में, मोरारजी को अक्सर नैतिकता का शिखर माना जाता है, लेकिन उनका शासन भारतीय खुफिया तंत्र (R&AW) के लिए एक मृत्यु-पत्र साबित हुआ। मोरारजी का शासन इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे किसी व्यक्ति की अति-नैतिकता, अहिंसा और गांधीवाद राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल सकते हैं।

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  • प्रतापगढ़ : जहां शिवाजी महाराज ने पहाड़ों को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया

    प्रतापगढ़ : जहां शिवाजी महाराज ने पहाड़ों को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया

    नवंबर 1659 के महीने में, प्रतापगढ़ की ऊबड़-खाबड़ ढलानों पर भारतीय इतिहास के सबसे निर्णायक युद्धों में से एक, प्रतापगढ़ का युद्ध हुआ। यहीं पर छत्रपति शिवाजी महाराज ने दूरदर्शिता और अद्वितीय सामरिक प्रतिभा से प्रेरित होकर, जावली के दुर्गम प्रतीत होने वाले पहाड़ों को एक अटूट किले में बदल दिया। उस दिन जो हुआ, वह केवल शक्तिशाली आदिलशाही सेनापति अफजल खान पर विजय नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि कैसे बुद्धि, भूभाग और स्वराज्य की भावना मिलकर क्रूर बल पर विजय प्राप्त कर सकती है।

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