जनजातीय समाज का इतिहास हमेशा से ही कठिन और संघर्षपूर्ण रहा है। जहां एक तरफ उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचारों से जमकर लोहा लिया, तो वहीं आजादी के बाद भी अपनी ही सरकारों से सौतेलेपन के व्यवहार को झेला। इस सबके बाद भी इन समुदायों ने हार नहीं मानी और जमकर अपनी अस्मिता और रीति-रिवाजों के लिए संघर्ष करते रहे। महिलाओं ने भी यह साबित कर दिखाया है कि वो किसी से कम नही हैं। जनजातीय इलाकों की जनजातीय समाज की महिलाएं न केवल खुद शिक्षित हो रही हैं बल्कि दूसरों के लिए भी सफलता के द्वार खोल रही हैं। ये महिलाएं किसी मिसाल से कम नहीं हैं, जो दूसरों की जिंदगियों को भी रोशन कर रही हैं।
इस आर्टिकल में ऐसी ही जनजातीय महिला शिक्षिकाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी व्यक्तिगत संघर्षपूर्ण यात्रा समाज में जागरुकता ला रही है। उन्होंने साहस, कौशल, बुद्धि और समर्पण के दम पर ये साबित कर दिया है कि अगर सोच लो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
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