Tag: Jammu Kashmir

  • मीरपुर का नरसंहार : धारा 370 के अंत की शुरुआत मीरपुर से हुई? पढ़िए 1947 के उस रक्तरंजित संघर्ष की पूरी कहानी

    मीरपुर का नरसंहार : धारा 370 के अंत की शुरुआत मीरपुर से हुई? पढ़िए 1947 के उस रक्तरंजित संघर्ष की पूरी कहानी

    The Mirpur Massacre: 5 अगस्त 2019 को धारा 370 समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य का भारत में पूर्ण रूप से संवैधानिक एकीकरण हुआ। हालांकि जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए इतिहास में अनेक संघर्ष हुए। इन्ही में से एक है मीरपुर का नरसंहार। 

    यह केवल एक शहर की लड़ाई नहीं थी, बल्कि अपनी जन्मभूमि और स्वाभिमान को बचाने का युद्ध था। 80 प्रतिशत हिंदू आबादी वाले इस शहर ने पाकिस्तान समर्थित हमलावरों के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। हर व्यक्ति सैनिक और प्रत्येक घर चौकी के रूप बदल गया था। यह जानते हुए भी कि शत्रु संख्या बल और हथियारों में बहुत शक्तिशाली है, फिर भी उन्होंने आत्मसमर्पण के बजाय प्रतिरोध का मार्ग चुना था। इसीलिए यह नरसंहार जम्मू कश्मीर राज्य के भारत में पूर्ण विलय और धारा 370 की समाप्ति के शुरुआती संघर्ष के तौर पर याद किया जाता है।

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  • मौत के मुहाने पर भक्ति: 2017 की अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले में बचे एक यात्री की दिल दहला देने वाली कहानी

    मौत के मुहाने पर भक्ति: 2017 की अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले में बचे एक यात्री की दिल दहला देने वाली कहानी

    रात के 8:00 बज चुके थे। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग हाईवे पर चारों ओर गहरा अंधेरा छा गया था। गुजरात की नंबर प्लेट वाली एक प्राइवेट बस में 50 से ज्यादा तीर्थयात्री सवार थे, जो अपनी अमरनाथ यात्रा पूरी करके लौट रहे थे।

    लगातार कई दिनों की यात्रा की थकान सबके चेहरों पर साफ़ झलक रही थी। फिर भी, उनके दिल बाबा बर्फानी (भगवान शिव) के दर्शन करने के परम आनंद से भरे हुए थे। जहां कुछ लोग अपनी सीटों पर पीछे की ओर सिर टिककर सोने की कोशिश कर रहे थे, वहीं कुछ लोग धीरे-धीरे भक्ति गीत गा रहे थे और ‘जय भोलेनाथ’ का जाप कर रहे थे। सब कुछ एकदम शांतिपूर्ण लग रहा था।

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  • बिना हाथों के जन्म लेकर दुनिया जीतने का लक्ष्य : माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पैरा ओलंपियन शीतल देवी को कैसे आकार दिया

    बिना हाथों के जन्म लेकर दुनिया जीतने का लक्ष्य : माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पैरा ओलंपियन शीतल देवी को कैसे आकार दिया

    जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ के दूरदराज पहाड़ों में, 2007 में पैदा हुई एक बच्ची को चुनौतियों से भरे भविष्य का सामना करना पड़ा। शीतल देवी, जो फोकोमेलिया के साथ और बिना हाथों के पैदा हुई थीं, लोइधर गांव में पली-बढ़ीं और अपने पैरों, कंधों और कमाल के बैलेंस से जिंदगी को जीना सीखा। पेड़ों पर चढ़ने की उनकी जबरदस्त काबिलियत उनके गांव में मशहूर हो गई। यह एक ऐसी कुदरती ताकत का संकेत था, जिसे तब तक किसी ने भी भविष्य की वर्ल्ड चैंपियन की नींव के तौर पर नहीं पहचाना था।

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