“बहुत हो चुका… उस मंदिर को गिरा दो। उन जलती हुई लपटों पर पानी डालो और उन्हें पूरी तरह बुझा दो!”
यह क्रूर आदेश 16वीं सदी (लगभग 1570) में मुगल शासक अकबर ने हिमाचल प्रदेश में स्थित पवित्र ज्वालामुखी देवी मंदिर पर अपने आक्रमण के दौरान दिया था। ज्वालामुखी मंदिर और उसकी शाश्वत लपटों को देवी का साक्षात स्वरूप माना जाता है। हालांकि, मुगल सम्राट अकबर ने यह साबित करने की हर संभव कोशिश की कि यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं है। उसने सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार ऐसा करने का प्रयास किया।
इसके बाद जो कुछ हुआ, वही इस कहानी का मूल है—यह एक ऐसी गाथा है जो बताती है कि कैसे अकबर का घोर अहंकार, ज्वालामुखी मंदिर की पवित्र और शाश्वत लपटों के सामने पूरी तरह से चूर-चूर हो गया।
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