महाराजा रणजीत सिंह ने बिखरी हुई मिसलों (सवेच्छा से बने स्वतंत्र सिख सैन्य संघ या समूह) को जोड़कर सतलुज से पेशावर तक एक शक्तिशाली साम्राज्य खड़ा किया, जिसकी नींव लाहौर की ऐतिहासिक जीत से पड़ी। लेकिन इस साम्राज्य के पीछे सिख इतिहास की महान योद्धा और रणजीत सिंह की सास रानी सदा कौर की राजनीतिक दूरदर्शिता, कूटनीति और युद्ध कौशल की बड़ी भूमिका थी। यह कहानी केवल लाहौर विजय की नहीं, बल्कि एक सास और दामाद के उस अटूट विश्वास की है जिसने तलवार और बुद्धि के बल पर इतिहास बदल दिया।
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