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  • 93 दिन, तीन आतंकवादी और एक मिशन : भारत के ‘ऑपरेशन महादेव’ की इनसाइड स्टोरी—वह तलाशी,जिसने पहलगाम हमले का बदला लिया

    93 दिन, तीन आतंकवादी और एक मिशन : भारत के ‘ऑपरेशन महादेव’ की इनसाइड स्टोरी—वह तलाशी,जिसने पहलगाम हमले का बदला लिया

    एक साल पहले, 22 अप्रैल 2025 को, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी के शांत घास के मैदान एक खौफनाक जगह में बदल गए थे, जब पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादियों के एक क्रूर आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। यह एक सुनियोजित हमला था, पहले हिंदू पुरुषों को अलग किया गया और फिर उनकी पत्नियों, बच्चों और परिवारों के सामने ही उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई। 

    लेकिन भारत न तो इसे भूला, और न ही उन्हें माफ किया। इसके बाद के हफ्तों में, एक दृढ़ और व्यवस्थित जवाबी कार्रवाई ने आकार लेना आरम्भ किया, जिसका नतीजा ‘ऑपरेशन महादेव’  नाम के एक बेहद सटीक आतंकवाद-रोधी अभियान के रूप में सामने आया।  इस अभियान ने यह सुनिश्चित किया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूढ़ निकाला जाए और उन्हें सजा दिलाई जाए। आज, हम विस्तार से बता रहे हैं कि यह पूरा ऑपरेशन कैसे अंजाम दिया गया और इस क्रूर हमले के दोषियों को कैसे सजा के कटघरे तक पहुंचाया गया।

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  • 2020 गलवान घाटी संघर्ष और आदर्शवाद की सीमाएं : एक खतरनाक पड़ोस में निरस्त्रीकरण पर भारत का दृष्टिकोण

    2020 गलवान घाटी संघर्ष और आदर्शवाद की सीमाएं : एक खतरनाक पड़ोस में निरस्त्रीकरण पर भारत का दृष्टिकोण

    15 जून 2020 को, पूर्वी लद्दाख में ऊंचाई वाली गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं में झड़प हुई। यह चार दशकों से ज्यादा समय में हुई सबसे भयंकर झड़प थी। सैनिकों ने पत्थरों, रॉड और तात्कालिक उपलब्ध हथियारों से यह लड़ाई लड़ी। पर मुख्य बात यह रही कि दोनों तरफ से भयंकर हथियार होने के बाद भी कोई गोली नहीं चली। यह 1993 और 1996 में हुए कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग एग्रीमेंट का नतीजा था, जिसमें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हथियारों के प्रयोग न करने पर दोनों देश सहमत हुए थे।

    इस टकराव ने एक विचित्र प्रश्न खड़ा किया : क्या विश्व में सभी युद्ध ऐसे ही लड़े जा सकते हैं, संयमित, तात्कालिक और नियंत्रित? गलवान झड़प ने सुझाव दिया कि विशेष स्थिति में भी तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसने यह भी बताया कि ऐसी स्थितियां कितने कम पर कोमल होती हैं, खासकर परमाणु हथियारों वाले शत्रुओं के बीच।

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