गलवान और ऑपरेशन सिंदूर यह साबित करते हैं कि परमाणु हथियारों से लैस शत्रुओं के सामने मजबूती से खड़े रहने के लिए सशस्त्र प्रतिरोध (डिटरेंस) आवश्यक है। भारत और उसकी सीमाओं की कहानी बताती है कि निरस्त्रीकरण एक व्यक्तिपरक अवधारणा (सब्जेक्टिव) है।
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कंचनप्रभा देवी : जब अकेली रानी ने महल का षड्यंत्र कुचलकर पाकिस्तान की चाल नाकाम कर दी
अगर त्रिपुरा पाकिस्तान का हिस्सा बन जाता, तो आज पूर्वोत्तर की तस्वीर कैसी होती? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चा मोड़ है भारतीय इतिहास का, जिसे मोड़ने वाली थीं एक युवा रानी कंचनप्रभा देवी। महाराजा बीर बिक्रम किशोर देवबर्मन की अचानक मौत, नाबालिग उत्तराधिकारी, महल के भीतर सत्ता की भूख और बाहर से पाकिस्तान समर्थित षड्यंत्र, सब मिलकर त्रिपुरा को भारत से दूर धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन रानी ने कहानी ही बदल दी।
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बालाकोट : 19वीं सदी के सैयद अहमद के ‘जिहाद’ से 21वीं सदी के ‘फिदायीन फैक्ट्री’ तक एक शहर की खतरनाक यात्रा
एक शहर, दो सदियां, एक पैटर्न, बालाकोट की कहानी कुछ ऐसी है, जहां 19वीं सदी के ‘जिहाद’ के नारे और 21वीं सदी की ‘फिदायीन फैक्ट्री’ एक ही पहाड़ियों और घाटियों के बीच पनपते दिखते हैं। कभी यह जगह सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायियों के लिए मजहबी युद्ध का मंच थी, तो बाद में यही इलाका जैश-ए-मोहम्मद (जैश) जैसे मजहबी आतंकियों के लिए तहरीक और ट्रेनिंग की जमीन बना।
पाकिस्तान में बालाकोट, खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के मानसेहरा जिले में कुन्हार नदी (काघन घाटी) के किनारे स्थित एक शहर है
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वह कहानी, जो पाकिस्तान, कश्मीर एकजुटता दिवस पर नहीं बताएगा : PoK में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर की विफलता
हर साल 5 फरवरी को पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के साथ ‘एकजुटता दिखाने’ के लिए ‘कश्मीर सॉलिडेरिटी डे’ मनाता है, जबकि कश्मीर का वह हिस्सा जिस पर उसने 22 अक्टूबर, 1947 को कब्जा कर लिया था (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर), खंडहर बन चुका है। सच तो यह है कि, जब पाकिस्तान J&K के लोगों के साथ खड़े होने का दावा करता है, तब वह छिपाता है कि जिस इलाके पर उसने कब्जा किया है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर की इतनी ज्यादा अनदेखी हुई है कि वहां बार-बार लोगों ने विद्रोह किया है और आज भी कर रहे हैं। हर इलाके में मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे वह सड़कें हों, अस्पताल हों, रेलवे हों, यूनिवर्सिटी हों, या बिजली की पहुंच हो, सिर्फ बातें नहीं हैं, बल्कि यह देखने का एक तरीका है कि कोई इलाका सच में तरक्की कर रहा है या नहीं।
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