स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू दुनिया को गुटनिरपेक्षता का उपदेश दे रहे थे, तभी एक छोटी-सी साप्ताहिक पत्रिका ने उनकी विदेश नीति को निशाना बनाया और विदेश नीति पर सवाल खड़े किए। नेहरू के लिए यह कोई साधारण आलोचना भर नहीं थी, बल्कि यह एक व्यक्तिगत चोट थी, जो इतनी चुभी कि उन्होंने संविधान ही बदल दिया। 1951 का पहला संविधान संशोधन, जो नेहरू की गहरी नाराजगी का नतीजा था, इसकी वजह थी रोमेश थापर की क्रॉस रोड्स मैगजीन, जो उनकी विदेश नीति की कटु आलोचना कर रही थी।
आइए, जानते हैं कि लोकतंत्र की शुरुआत में ही प्रेस की आवाज दबाने की कोशिश क्यों और कैसे शुरू हुई?
और पढ़ें
