झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वह अमर सहयोगी, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर रानी को अंग्रेजों के चंगुल से बचाया, वह नाम है झलकारी बाई। 1858 के मार्च-अप्रैल में जब ब्रिटिश सेना के जनरल सर ह्यू रोज ने झांसी के किले को घेर लिया था, तब स्थिति अत्यंत विकट हो चुकी थी। इस घड़ी में झलकारी बाई ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया, जो इतिहास की किताबों में स्वर्ण अक्षरों से लिखा गया। आइए, जानते हैं कि झलकारी देवी रानी लक्ष्मीबाई के संपर्क में कैसे आईं, उनकी खास बनी और जब रानी पर खतरा मंडराया, तो किस तरह के अपनी जान पर खेलकर कैसे इतिहास रच दिया।
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