पीढ़ियों तक, अंग्रेज, जिन्होंने लगभग 200 सालों तक भारत पर कब्जा कर के रखा, हमें बहुत भरोसे के साथ एक झूठी कहानी सुनाते रहे कि यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ही थी, जो भारतीय जल क्षेत्र में व्यवस्था, सुरक्षा और मॉडर्न शिपिंग लाई। उनके नैरेटिव के अनुसार, अंग्रेज ही थे, जिन्होंने समुद्री रास्ते खोले, ‘पाइरेसी’ को दबाया, और एक डिसिप्लिन्ड समुद्री सिस्टम लाया।
फिर भी इस नैरेटिव के पीछे एक चौंकाने वाली सच्चाई छिपी है। जिन जहाजों ने ब्रिटिश दबदबे को मुमकिन बनाया, वे पानी में भारत की मौजूदा एक्सपर्टीज का नतीजा थे। उन्होंने जिन जहाजों का प्रयोग किया, वे ज्यादातर भारतीय सामग्री से, भारतीय डॉकयार्ड में और भारतीय जहाज बनाने वालों के लिए लंबे समय से जानी-पहचानी तकनीक से बनाए गए थे। कुल मिलाकर, जिस ब्रिटिश साम्राज्य ने समुद्र को सभ्य बनाने का दावा किया, वह उसी समुद्री दुनिया में भारतीय विशेषज्ञता पर बहुत ज्यादा निर्भर था, जिस पर वह दबदबा बनाना चाहता था।
और पढ़ें
