17 दिसंबर 1928 का दिन लाहौर के इतिहास में क्रांतिकारी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य भगत सिंह और शिवराम राजगुरु ने लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेते हुए ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी. सॉन्डर्स को गोली मार दी।
वास्तविक निशाना जेम्स स्कॉट था, लेकिन सॉन्डर्स मारा गया। हत्या के तुरंत बाद ब्रिटिश पुलिस ने पूरे लाहौर में सख्त नाकेबंदी लगा दी। सैकड़ों पुलिसकर्मी, खुफिया एजेंट और चेकपॉइंट्स सक्रिय हो गए। वे खासतौर पर दाढ़ी-केश वाली सिख छवि वाले युवा क्रांतिकारी भगत सिंह की तलाश में थे। शहर में तनाव व्याप्त था और गिरफ्तारी लगभग तय मानी जा रही थी।
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