26 अक्टूबर 2020 को हरियाणा के फरीदाबाद में 21 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर की हत्या हुई थी. निकिता हत्याकांड से पहले तथाकथिक सेक्युलर यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि देश में ‘लव जिहाद’ का खेल जारी है. इस घटना के बाद देश भर में लव जिहाद पर व्यापक स्तर चर्चा शुरू हुई थी. शहर से लेकर गांव तक ‘लव जिहाद’ पर चर्चा होने लगी. बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों ने अपने प्राइम टाइम शो में लव जिहाद की जगह दी.
इस घटना के बाद, सबसे पहले 27 नवंबर, 2020 को उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी धार्मिक परिवर्तन प्रतिषेध कानून बना. फिर 2022 में हरियाणा में भी लव जिहाद रोकने के लिए कानून लागू हुआ. इस आर्टिकल में हम निकिता तोमर हत्याकांड से जुड़ी पूरी जानकारी डिटेल से जानेंगे.
हिंदू नाम बताकर की दोस्ती
हत्यारे तौसीफ अहमद ने निकिता को अपना हिंदू नाम ‘अंकित’ बताकर उससे जान पहचान बढ़ाई थी. तौसीफ अपनी झूठी हिंदू पहचान अंकित नाम के जरिए निकिता का भरोसा जीतकर उसे लव जिहाद के चंगुल में फंसाना चाहता था, लेकिन निकिता ने उसकी असलियत का पता चलने पर दूरी बना ली थी.
फिर भी तौसीफ निकिता की हत्या करने से पहले, लगभग 3 सालों से उस पर इस्लाम स्वीकार कर निकाह करने का दबाव बना रहा था. घटना से ढाई महीने पहले उसने निकिता को प्रताड़ित करना और बढ़ा दिया था, जिसके चलते पूरा परिवार परेशान था.
तौसीफ और निकिता फरीदाबाद के एक ही स्कूल में पढ़ते थे. तौसीफ उससे 1 साल सीनियर था, वह 12वीं का छात्र था, जबकि निकिता कक्षा 11 में पढ़ती थी. 12वीं में पढ़ते समय तौसीफ की उम्र 16 से 17 साल के बीच रही होगी. इस उम्र में उनकी मानसिकता इतनी जिहादी थी कि उसने अपना नाम अंकित बताकर निकिता से दोस्ती की थी.

हिंसक वेब सीरीज से था प्रभावित
तौसीफ अहमद ‘मिर्जापुर’ नाम की वेब सीरीज से प्रभावित था. यह बात उसने पुलिस की पूछताछ में स्वयं स्वीकार की थी. जैसा कि हमेशा देखा जाता है कि फिल्मों, सीरियल या फिर वेब सिरीज्स में हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश के तहत किरदार निर्धारित किए जाते हैं, इसी साजिश के तहत मिर्जापुर वेब सिरीज में मुन्ना भैया नाम के एक किरदार को गढ़ा गया था. वेब फिल्म में मुन्ना भैया (दिव्येंदु शर्मा) स्वीटी (श्रेया पिलगांवकर) नाम की एक लड़की से एकतरफा प्रेम करता था. लेकिन स्वीटी के मना करने पर, वह उसे गोली मार देता.
हत्या से पहले कार में खींचने की कोशिश की
26 अक्टूबर 2020 को, निकिता अग्रवाल कॉलेज फरीदाबाद से बी.कॉम (थर्ड ईयर) का पेपर देकर निकली थी. वह कॉलेज के गेट पर खड़ी थी, तभी तौसीफ अहमद अपने कट्टरपंथी दोस्त रेहान के साथ, कार से वहां पहुंचा. तौसीफ ने जबरन निकिता को कार में खींचने का प्रयास किया. लेकिन उसके न मानने पर उसने वहीं पर ही सिर में गोली मारकर हत्या कर दी. जब निकिता की हत्या हुई तब उसका भाई नवीन तोमर और मां विजयवती सिंह तोमर घटना स्थल से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर ही थीं.
निकिता की हत्या करने की साजिश पहले ही रची जा चुकी थी. इसके लिए तौसीफ के मामा ने उसे एक अवैध पिस्तौल उपलब्ध करवाई थी. तौसीफ के परिवार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. 30 जून 2016 को तौसीफ के मामा इस्लामुद्दीन का नाम, सुरेंद्र फोगाट नामक हिंदू पुलिस निरीक्षक के अपहरण में सामने आया था. जिसमें वह मुख्य साजिशकर्ता था. इस केस में वह 10 सालों की सजा काट रहा है. इस्लामुद्दीन ने ही अपने दोस्त का नाम बताकर तौसीफ को अवैध पिस्तौल उपलब्ध करवाई थी.
धर्म भ्रष्ट करने के उद्देश्य से किया था अपहरण
तौसीफ की मुस्लिम पहचान उजागर होने पर निकिता ने उससे पूरी तरह से दूरी बना ली थी. जिसके चलते 2 अगस्त, 2018 की सुबह करीब 9 बजे, तौसीफ ने निकिता का अपहरण कर लिया. तौसीफ निकिता का धर्म भ्रष्ट करना चाहता था. जब निकिता किसी तरह उसके चंगुल से बचकर निकली और अपने घर पहुंची, तो उसने अपने माता-पिता से बताया था कि तौसीफ ने उसे इसलिए अगवा किया था, ताकि बदनामी के चलते उसकी शादी न हो. जिसके बाद उसके पास तौसीफ के साथ निकाह करने के अलावा कोई विकल्प न बचे.
इस घटना के बाद निकिता के पिता मूलचंद्र तोमर ने 3 अगस्त 2018 को बल्लभगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन तौसीफ के परिवार की कांग्रेस और गांधी परिवार से नजदीकी के चलते पीड़ित परिजनों पर दबाव बनाकर केस वापस कर लिया गया था.

वामपंथी मीडिया ने हिंसक हिंदू का गढ़ा नरेटिव
The Quint जैसे वामपंथी मीडिया संगठनों ने निकिता तोमर हत्याकांड के बाद उसके घर से ग्राउंड रिपोर्टिंग की. The Quint ने आरोपी तौसीफ के कृत्य पर सवाल उठाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाए, हिंदू संतों और संगठनों को ही हिंसक घोषित करने की मानसिकता से रिपोर्ट तैयार की. जबकि यही The Quint जब किसी मुस्लिम युवक की मौत होती है, तो इसे मॉब लिंचिंग घोषित कर हिंदू समाज को हिंसक और मुस्लिम समाज के डर में जीने का माहौल तैयार करते हैं.
The Quint इस मामले में इकलौता नहीं था, न्यूजलॉन्ड्री व अन्य वामपंथी मीडिया संगठनों ने निकिता तोमर हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाए हिंदू विरोधी एजेंडा चलाया.
कांग्रेस व गांधी परिवार का करीबी है तौसीफ का परिवार
तौसीफ अहमद का चचेरा भाई आफताब अहमद वर्तमान में हरियाणा की नूंह विधानसभा सीट से कांग्रेस का विधायक है. वह हुड्डा सरकार में मंत्री भी रह चुका है.

कांग्रेस विधायक आफताब अहमद (तौसीफ अहमद का चचेरा भाई) सोनिया गांधी के साथ
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तौसीफ के बाबा चौधरी कबीर अहमद 1975 में नूंह और 1982 में तौरु विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे हैं. जबकि उसके बड़े अब्बा खुर्शीद अहमद की गिनती कांग्रेस के बड़े नेता के तौर पर होती है.

कांग्रेस विधायक आफताब अहमद (तौसीफ अहमद का चचेरा भाई) राहुल गांधी के साथ
पढ़ने में अच्छी थी निकिता
निकिता ने 2018 में इंटरमीडिएट की परीक्षा 95% अंक लाकर पास की थी. वह हमेशा क्लास में टॉप करती थी. इसके लिए उसे कई मेडल और ट्रॉफियां भी मिली थीं. निकिता की तैयारी सेना में जाने की थी, उसके परिवार के कई लोग सेना में अपनी सेवाएं दे चुक हैं. हत्या से कुछ दिन पहले निकिता ने एयर फ़ोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) दिया था. लेकिन उसके और उसके माता-पिता के सपने पूरे होते, इससे पहले ही मजहबी कट्टरपंथी ने उसकी जान ले ली.

निकिता को मिली ट्रॉफियां, इमेज सोर्स- swarajyamag
हत्या की जांच करने के लिए SIT का गठन
निकिता तोमर हत्या कांड की जांच करने के लिए पुलिस की स्पेशल इनविटेशन टीम (SIT) का गठन हुआ था. SIT ने 11 दिनों बाद फरीदाबाद जिला अदालत 700 पन्नों की रिपोर्ट दाखिल की थी. तौसीफ और उसके सहयोगियों के खिलाफ IPC की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र), 302 (हत्या), 364 (अपहरण), धारा 366 ( जबरन विवाह करने के उद्देश्य से अपहरण करना), धारा 511/120B/34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1B)(A), 27(1) के तहत मामला दर्ज हुआ. इस मामले में पुलिस ने कोर्ट के सामने 57 गवाह और 25 सबूत पेश किए थे.
कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
फरीदाबाद जिला न्यायालय की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 23 मार्च 2021 को तौसीफ और रेहान को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा व 20-20 हजार का जुर्माना लगाया था. तौसीफ ने हाईकोर्ट में अपील कर दोबारा जांच की मांग की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी थी.
वहीं, 14 जुलाई 2022 को तौसिफ और रेहान की उम्रकैद की सजा फांसी में बदलने और बरी आरोपी अजहरुद्दीन को दोषी करार देकर को लेकर हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल की थी. जिसे स्वीकार कर लिया गया है.
2022 में हरियाणा में बना लव जिहाद कानून
निकिता तोमर हत्या कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस शुरू हुई. क्योंकि मामला लव जिहाद से प्रेरित था, इसलिए हिंदू बहन-बेटियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना. इसी घटना के बाद हरियाणा सरकार ने लव जिहाद कानून बनाया था. 2022 में हरियाणा विधानसभा में यह कानून पारित हुआ.
सोशल मीडिया पर लव जिहाद की चर्चा
निकिता तोमर हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर लव जिहाद को लेकर चर्चा प्रारंभ हुई. आमलोगों के साथ-साथ प्रतिष्ठित पत्रकारों, नेताओं व समाज सेवियों ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी.
फरीदाबाद में हिंदू लड़की निकिता तोमर की दिनदहाड़े हुई हत्या ने वही साबित कर दिया है जो मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं: हिंदू लड़कियों के माता-पिता को बचपन से ही अपनी बेटियों को लव जिहाद के प्रति जागरूक करना चाहिए. उन्हें झूठे हिंदू नाम रखने वाले लड़कों को पहचानने के तरीके भी विकसित करने चाहिए.
त्रिपुरा, मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने ट्वीट करते हुए प्रतिक्रिया दी थी– फरीदाबाद में हिंदू लड़की निकिता तोमर की दिनदहाड़े हुई हत्या ने वही साबित कर दिया है जो मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं: हिंदू लड़कियों के माता-पिता को बचपन से ही अपनी बेटियों को लव जिहाद के प्रति जागरूक करना चाहिए. उन्हें झूठे हिंदू नाम रखने वाले लड़कों को पहचानने के तरीके भी विकसित करने चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत उमराव ने लिखा ट्वीट करते हुए लिखा– हरियाणा बल्लभगढ़ में मोहम्मद तौफीक नें #LiveJihad में असफल होने पर कॉलेज से वापस आ रही निकिता तोमर को दिन दहाड़े मार डाला.
तौफीक ने निकिता को जबरन कार में बिठाने का प्रयास किया था. असहिष्णुता ब्रिगेड अब सेक्युलर बुरके में घुसी.
लेखिका शेफाली वैद्य ने ट्वीट करते हुए लिखा– निकिता तोमर बस एक सामान्य ज़िंदगी जीना चाहती थी, अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थी, वर्दी पहनना चाहती थी, अपना करियर बनाना चाहती थी, जीना चाहती थी, प्यार करना चाहती थी, हंसना चाहती थी. लेकिन तौसीफ ने उसे मार डाला, क्योंकि उसने अपहरण से इनकार कर दिया था. क्योंकि उसने विरोध किया था। क्योंकि वह हिंदू ही रहना चाहती थी!
स्तंभकार सुनंदा वशिष्ठ ने निकिता तोमर की हत्या पर अपने ट्वीट में लिखा– निकिता
के पिता कहते हैं, “वह पिछले कुछ हफ़्तों से लगातार उसे फ़ोन कर रहा था और उस पर इस्लाम धर्म अपनाने और उससे निकाह करने का दबाव बना रहा था, लेकिन उसने इनकार कर दिया था. धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर निकिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
इंडिया टीवी की पत्रकार मीनाक्षी जोशी ने अपने ट्वीट में लिखा– “निकिता को तौसिफ से शादी कर लेनी चाहिए थी.” “बेकार में मेरे बेटे को उसकी जान लेनी पड़ी.” ये बयान #NikitaTomar के हत्यारे तौसिफ की मां के हैं. जड़ ही बता रही है कि पौधा कितना जहरीला है. औरत ही औरत की दुश्मन है.

